Ishwar Hi Hai - Tum Koun Ho Yah Pata Karo Pakka Karo: Who Am I Now (Hindi Edition) ebook
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Ishwar Hi Hai - Tum Koun Ho Yah Pata Karo Pakka Karo: Who Am I Now (Hindi Edition)

कभी-कभी हमारे मन में यह जिज्ञासा आती है कि मैं कौन हूँ, ईश्वर कौन है, मैं कौन नहीं हूँ इत्यादि। जब ऐसी जिज्ञासाओं का कोई हल नहीं मिलता, तो हमारे अंदर संशय और बेचैनी पैदा हो जाती है जिसका परिणाम यह होता है कि हमारा जीवन नकारात्मक विचारों के दुष्परिणामों से प्रभावित होता रहता है तथा हमारा चेतन विश्वास तथा अज्ञानता के भॅंवर में गोते लगाता रहता है। यह पुस्तक हमारी इन्हीं जिज्ञासाओं को शांत करती है। इस...

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Print Length: 202 pages
Publisher: WOW Publishings (September 26, 2017)
Publication Date: September 26, 2017
Sold by: Amazon Digital Services LLC
Language: Hindi
ASIN: B075YPM2LH
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Format: PDF Text djvu book

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‘Deighton’s research and plotting are as surefooted as ever, while the pace and tension leave one almost breathless. Recommend to anyone; although it might be nightmare material for the younger set. ebook Ishwar Hi Hai - Tum Koun Ho Yah Pata Karo Pakka Karo: Who Am I Now (Hindi Edition) Pdf. Anyone interested in understanding the cultural and historical underpinnings of events in the news in recent years out of the St. Carola Hicks has written an almost compulsively readable book about the painting. she wants the cake but doesn't want to make that commitment. I lead such a pedestrian life that not much changes week to week. The author contends that modernity is possible only on "the transcultural site"―transcultural in the sense of breaking the divide between past and present, elite and popular, national and regional, male and female, literary and non-literary, inside and outside. It's safe to say that Professor Winsnicker's Book of Proper Etiquette for Well-mannered Sycophants is one of my favorite books ever.
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पुस्तक के माध्यम से हम "अपनी पूछताछ' का मार्ग तलाश सकते हैं और अपने मनोशरीरयंत्र की पूछताछ ईमानदारी के साथ करते हुए "समझ' की मंजिल पा सकते हैं। पुस्तक मूलतः 6 खण्डों में विभाजित है, जिसके प्रथम खण्ड में "मशहूर मंत्र' यानी "अपने होने के एहसास' की कला समझाई गई है। अन्य खण्डों में "ईश्वर कौन', "मैं कौन नहीं' "मनोशरीर यंत्र कौन', "मैं कौन' और अन्त में "गुमनाम मंत्र' के द्वारा हम अपनी पूछताछ की संपूर्ण विधि जानकर अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। पुस्तक में प्रख्यात तेजगुरु सरश्री द्वारा शिष्यों द्वारा पूछे गए जिज्ञासा मूलक सवालों के सरल जवाब दिए गए हैं। ये सभी समाधान विषय की जटिलता को कम करके हमें स्व अनुभव की गहराइयों तक ले जानेवाले हैं। पुस्तक सरल भाषा और रोचक प्रसंगों द्वारा प्रस्तुत की गई है, जिसका पाठकों पर अमिट प्रभाव पड़ता है।ABOUT THE AUTHORसरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अण्डरस्टैण्डिंग)सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है’सरश्री ने दो हजार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सत्तर से अधिक पुस्तकों की रचना की है ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल ऍण्ड सन्स इत्यादि